रेस्टोरेंट संगठनों की याचिकाएं खारिज कोर्ट ने लगाया जुर्माना
सौजन्य :- हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अहम फैसले में कहां की रेस्टोरेंट खाने के बिल में जबरन सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकते.
कोर्ट ने इसे उपभोक्ता हितों के खिलाफ और अनुचित व्यापारिक तरीका बताया है. कोर्ट ने कहा कि सर्विस चार्ज या टिप ग्रह की मर्जी से दी जाने वाली राशि है, इसे अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता. इसे अलग-अलग नाम से बिल में जोड़ना धोखाधड़ी है.
ग्राहक को यह जानने का अधिकार है कि वह किस चीज के लिए कितना भुगतान कर रहा है. फेडरेशन ऑफ़ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया( एफएचआरऐआई ) और नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया( एन आर ए आई ) ने 2022 में कोर्ट में याचिका दायर कर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण( सीसीपीए ) की गाइडलाइन को चुनौती दी थी.
इन गाइडलाइन में होटल और रेस्टोरेंट को सर्विस चार्ज अनिवार्य रूप से वसूलने से रोका गया था. कोर्ट ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया और दोनों संगठनों पर एक एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया.